"आदरणीय अन्ना जी....कहॉ से शुरू करूं....पर कहना तो पड़ेगा...मोहब्बत जो की थी आपसे....हमने ही कहॉ था ना....अन्ना नही ये आंधी है, देश का दूसरा गॉधी है! तो हिसाब तो ये देश गॉधी तक से मॉग लेता है...आप तो अन्ना ही रह गये सर....गॉधी से बहुत दूर रह गये आप...हमने कोशिश की आपमें देख लें वो मूरत..महात्मा को देखा जो नही था हमारी जनरेशन ने सर...निरे मूर्ख साबित कर दिये आपने ...ये भी समझा दिया की प्रतीकों मे रूह नही लायी जा सकती है....कोई दूसरा गॉधी लाया नही जा सकता...वो खुद आता है....और आपको तो रालेगन सिद्धी से ले आया गया था ना...पर फिर भी मै एक मूर्ख होकर भी ये तो समझ ही जाता हूं सर कि इतिहास गॉधी बनने का मौका किसी विरले शख्स को ही देता है...आपको तो दिया था ना...आप क्यूं चूक गये सर???
क्यूं मिले थे आप सब लोग....आप तो ये तक भूल गये है सर?....क्यूं बार बार रास्ते बदलने पड़ते है आपको और आपके कुछ रीढ़हीन साथियो को....क्यूं मुझे और मुझ जैसे बहुत से लोगो को ये लगने लगा है कि आप पूरी शिद्दत से अगर कोशिश कर रहे है तो सिर्फ अपनी पहचान बचाने की?? जिस बात के लिए आप गॉधी के प्रतीक बने या बना दिये गये...वो बात तो मै , मेरा, हमारा और उनका मे बहुत पीछे़ छोड़ आये सर आप....आपने जिनको त्याग दिया है वो अर्जुन से लगते है और जिनसे आपको मोह है वो दुर्योधन की तरहा सामने आने लगे है...आप खुद गॉधी नही तो भीष्म जैसे ही बन जाते...आप तो जबसे टी वी पर एड में नजर आने लगे हो...जाने क्यूं महान नही लगते....त्यागी नही लगते...वैसे निडर नही लगते सर....लगता है कुछ अपना बचाना चाहते हो आप...इतिहास से कोई सस्ती उपमा नही दूंगा आपको...सम्मान किया है आपका...मोहब्बत भी की है....लेकिन सच कहे बिना भी नही रह सकता सर....सच कहता हूं इसलिए तो आपसे जुड़ा था और इसलिए ही अब आपको छोड़कर भी चला आया हूं, आपके त्यागे हुए कुछ अर्जुनो के साथ , उसी मकसद के लिए जिसके लिए आपको गॉधी बनाया गया था....अफसोस, आपने निऱाश किया सर!!!.....प्रणाम...आम आदमी!!"
डॉ विकास
क्यूं मिले थे आप सब लोग....आप तो ये तक भूल गये है सर?....क्यूं बार बार रास्ते बदलने पड़ते है आपको और आपके कुछ रीढ़हीन साथियो को....क्यूं मुझे और मुझ जैसे बहुत से लोगो को ये लगने लगा है कि आप पूरी शिद्दत से अगर कोशिश कर रहे है तो सिर्फ अपनी पहचान बचाने की?? जिस बात के लिए आप गॉधी के प्रतीक बने या बना दिये गये...वो बात तो मै , मेरा, हमारा और उनका मे बहुत पीछे़ छोड़ आये सर आप....आपने जिनको त्याग दिया है वो अर्जुन से लगते है और जिनसे आपको मोह है वो दुर्योधन की तरहा सामने आने लगे है...आप खुद गॉधी नही तो भीष्म जैसे ही बन जाते...आप तो जबसे टी वी पर एड में नजर आने लगे हो...जाने क्यूं महान नही लगते....त्यागी नही लगते...वैसे निडर नही लगते सर....लगता है कुछ अपना बचाना चाहते हो आप...इतिहास से कोई सस्ती उपमा नही दूंगा आपको...सम्मान किया है आपका...मोहब्बत भी की है....लेकिन सच कहे बिना भी नही रह सकता सर....सच कहता हूं इसलिए तो आपसे जुड़ा था और इसलिए ही अब आपको छोड़कर भी चला आया हूं, आपके त्यागे हुए कुछ अर्जुनो के साथ , उसी मकसद के लिए जिसके लिए आपको गॉधी बनाया गया था....अफसोस, आपने निऱाश किया सर!!!.....प्रणाम...आम आदमी!!"
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